प्रदर्शन / दिल्ली में किसान घाट पहुंचने के बाद किसानों ने आंदोलन खत्म किया

प्रदर्शन / दिल्ली में किसान घाट पहुंचने के बाद किसानों ने आंदोलन खत्म किया
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प्रदर्शन / दिल्ली में किसान घाट पहुंचने के बाद किसानों ने आंदोलन खत्म किया

2018-10-03 11:31:19
  • भारतीय किसान संघ ने मंगलवार को कहा था- हमें सरकार के आश्वासन नामंजूर, आंदोलन जारी रहेगा
  • सरकार ने कहा- हम मांगों पर गौर करेंगे, पर किसान संतुष्ट नहीं 
  • किसान क्रांति पदयात्रा 23 सितंबर को हरिद्वार में टिकैत घाट से शुरू हुई थी

 

नई दिल्ली.  भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने बुधवार सुबह अपना आंदोलन खत्म कर दिया। मंगलवार रात यूपी-दिल्ली बॉर्डर पर रोके गए किसानों को दिल्ली पुलिस ने देर रात किसान घाट जाने की इजाजत दे दी। इसके बाद आंदोलनकारी किसान घाट स्थित चौधरी चरण सिंह के मेमोरियल पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। यहीं पर किसानों ने अपनी यात्रा खत्म करने का ऐलान किया। भाकियू के नेता नरेश टिकैत ने कहा कि हमारा मकसद पूरा हो गया। अब हम अपने गांव लौट जाएंगे।

 

दिल्ली बॉर्डर पर डटे किसानों को देर रात राजधानी में घुसने की इजाजत दी गई थी। किसान बस, ट्रैक्टर और अन्य वाहनों से सीधे किसान घाट पहुंचे। इससे पहले, किसानों को मंगलवार देर रात गाजियाबाद-दिल्ली बॉर्डर पर दिल्ली गेट के पास रोक दिया था। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों ने अपनी मांगों को सरकार से मनवाने के लिए हरिद्वार में टिकैत घाट से 23 सितंबर को किसान क्रांति यात्रा शुरू की थी। इसमें यूपी समेत सात राज्यों के किसान शामिल हुए।

 


यूपी गेट पर झड़प, 7 पुलिसकर्मी और 36 से ज्यादा किसान घायल: गांधी जयंती के दिन दिल्ली और यूपी की सीमा पर किसानों और जवानों के बीच जमकर हिंसा हुई। ये किसान कर्ज माफी, पेंशन और उपज का वाजिब दाम जैसी मांगों को लेकर पैदल दिल्ली पहुंचना चाहते थे। पुलिस ने सड़कों पर बैरीकेड लगाकर उन्हें सीमा पर ही रोकने की कोशिश की। बीते 10 दिनों से पैदल चल रहे किसानों ने अपने ट्रैक्टरों की मदद से बैरीकेड हटाकर जबरन घुसने की कोशिश की। इस पर पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठी चार्ज किया। आंसू गैसे के गोले भी दागे और हवाई फायरिंग भी की। हिंसा में एसीपी सहित 7 पुलिसकर्मी और 36 से ज्यादा किसान घायल हुए हैं। 


किसानों ने राजनाथ से मुलाकात की: मामले को बढ़ता देख सरकार भी हरकत में आई। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि राज्यमंत्री जीएस शेखावत ने किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इसमें यूपी के मंत्री लक्ष्मी नारायण और सुरेश राणा भी मौजूद थे। राजनाथ सिंह ने भाकियू प्रमुख नरेश टिकैत से फोन पर बात भी की। 


किसानों ने सरकार की बात नहीं मानी: प्रदर्शन खत्म कराने के लिए सरकार ने ऐलान किया कि मुख्यमंत्रियों की समिति उनकी मांगों पर गौर करेगी। लेकिन किसान इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि वे पूरी तैयारी के साथ आए हैं और मांगे पूरी होने तक आंदोलन जारी होगा। इससे पहले सोमवार रात को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने किसान नेताओं से मुलाकात कर यात्रा खत्म कराने की कोशिश की थी। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने गांधीजी की जयंती पर किसानों के खिलाफ बर्बर पुलिस कार्रवाई कराने का केंद्र सरकार पर आरोप लगाए हैं।

 

इन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे 20 हजार किसान

  • गन्ना किसानों को बकाया समर्थन मूल्य तुरंत दिया जाए। 
  • स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को तुरंत लागू किया जाए। इसमें फसलों की लागत से 50 फीसदी ज्यादा दाम किसानों को दिलवाना, कृषि जोखिम फंड बनाना, सरप्लस जमीन का वितरण करना, किसानों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दर कम करना शामिल है।
  • कर्ज माफी की जाए। सिंचाई के लिए ट्यूबवेल चलाने के मकसद से मुफ्त बिजली दी जाए।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सभी फसलों के लिए लागू हो। इसकी प्रीमियम सरकार दे।
  • एनसीआर से 10 साल पुराने डीजल ट्रैक्टरों को हटाने का एनजीटी का फैसला वापस हो।
  • 60 साल की उम्र के बाद छोटे किसानों के लिए 5000 रुपए महीना पेंशन शुरू की जाए।